छवि बदलने की क्या जरूरतः विद्या बालन
   फिल्म 'परिणीता' से पारंपरिक भारतीय नारी के रूप में दर्शकों के दिल में जगह बनाने वाली सिने तारिका विद्या बालन का कहना है कि वह बिंदास किरदार चुनकर अपनी छवि बदलने की कोशिश नहीं कर रही हैं। इंदौर। फिल्म 'परिणीता' से पारंपरिक भारतीय नारी के रूप में दर्शकों के दिल में जगह बनाने वाली सिने तारिका विद्या बालन का कहना है कि वह बिंदास किरदार चुनकर अपनी छवि बदलने की कोशिश नहीं कर रही हैं। अपनी अगली फिल्म 'इिश्कयां' के प्रचार में जुटी विद्या ने यहां कहा- साफगोई से कहूं तो मैंने अपनी छवि बदलने की कोशिश कभी की ही नहीं। वैसे यह सच है कि मैं बतौर अदाकार अलग-अलग किरदार निभाती रही हूं। बहरहाल 32 वर्षीय अभिनेत्री 'परिणीता' के बाद 'हे बेबी' और 'किस्मत कनेक्शन' जैसी फिल्मों में आधुनिक लुक और बिंदास अंदाज में नजर आई थीं। वह हालांकि इस बात को खारिज करती है कि बिंदास किरदारों के चयन के पीछे उनका मकसद पारंपरिक भारतीय नारी की अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलना है।
यह पूछे जाने पर कि फिल्म 'इश्किया' में उनका किरदार बिंदास बताया जा रहा है, वह जोर देकर कहती हैं कि मेरी हर फिल्म में मेरा वही पुराना व्यक्तित्व नजर आता है, जिसे दर्शक साफ महसूस कर सकते हैं। उन्होंने कहा- मैंने अब तक कोई दस हिन्दी फिल्मों में अभिनय किया है। हर फिल्म में मेरी यही कोशिश रही कि मैं कुछ अलग करूं। मैं किसी दायरे में नहीं बंधना चाहती। विद्या अपनी पिछली रिलीज फिल्म 'पा' में महानायक अमिताभ बच्चन की मां के रूप में नजर आई थीं। फिल्म 'इश्किया' में वह मंजे हुए अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ एक विधवा के किरदार में दिखाई देंगी।
वह कहती हैं कि महान कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिलना एक सपने के सच होने जैसा है। इससे आपका अभिनय और निखरता है। मुझे लगता है कि मैं इस मामले में नसीबवाली रही हूं। विद्या ने बताया कि वह सपने खूब देखती हैं मगर जब उनसे उनके सपनों के राजकुमार के बारे में पूछा जाता है तो वह बड़ी खूबसूरती के साथ यह सवाल टाल देती हैं। वह चुटकुलेदार लहजे में कहती हैं कि मुझे सपनों में अपने राजकुमार का चेहरा नहीं दिखाई देता, सिर्फ आवाज सुनाई देती है। यह आवाज किसकी है, मैं आपको बता नहीं सकती। विद्या अगले ही पल साफ करती हैं कि यह मजाक था और इसका कुछ और मतलब न निकाला जाये। फिल्म अभिनेता शाहिद कपूर के जिक्र पर उन्होंने कहा कि वह अभिनय के लिए बेहद समर्पित है। लिहाजा उनके साथ काम करके भी उन्हें बहुत अच्छा लगा।

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