प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाएं
जया शुक्‍ला
दीपावली आने वाली है और कुछ स्कूलों व कालेजों में प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने पर जो़र दिया जा रहा है। आप जब स्कूल या कालेज में रहे होंगे, तो शायद आपने भी प्रदूषण मुक्ता दीपावली मनाने की शपथ ली होगी। बचपन में ऐसी शपथ लेना थोड़ा मुश्किल होता है।
लेकिन आज आप एक जि़म्मेदार नागरिक हैं और वातावरण के प्रति अपनी जि़म्मे दारियां समझते हैं। पटाखों का कुछ पल का मज़ा वातावरण में ज़हर घोल देता है। इनमें मौजूद नाइट्रोजन डाइआक्‍साइड, सल्फवर डाइआक्साइड जैसे हानिकारक प्रदूषक अस्थमा व ब्रान्‍काइटिस जैसी सांसों से संबंधी समस्याओं को जन्म देते हैं।लेकिन कुछ मापदंडों को अपनाकर, आप इन हानिकारक प्रदूषकों से बच सकते हैं।

कैसे बरतें सावधानी:
• अगर आपको दमा या सांसों से संबंधी समस्याआ हैं, तो घर के अंदर ही रहें और धुंए से बचने का प्रयास करें। ऐसे में अगर आपको बाहर जाना ही है, तो अपनी दवाएं साथ रखें और मास्कप लगाकर बाहर जायें।
• दीपावली का समय आते ही लोग घर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं और घर के बेकार सामानों को बाहर फेंक देते हैं। इनमें कुछ ऐसे सामान भी होते हैं, जो अजैविक होते हैं और वातावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे सामानों को इधर-उधर ना फेंकें।
• पटाखों से निकलने वाली आवाज़ अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाती हैं और यह स्वास्‍थ्‍य के लिए भी हानिकारक होती है। दीपावली में सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाये जाने वाले ‘लक्ष्मी बम’ से 100 डेसिबेल(ध्वनि नापने की इकाई) आवाज़ आती है और 50 डेसिबेल से तेज़ आवाज़ के स्तर को मनुष्य के लिए हानिकारक माना जाता है। शायद आप नहीं जानते, अचानक बहुत तेज़ आवाज़ सुनने से व्याक्ति बहरा भी हो सकता है और इस कारण हृदय के मरीज़ों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। तो आज ही यह बात अपने दोस्तों में फैला दें कि आप इस बार प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने वाले हैं।

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