हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अहादीस (प्रवचन)
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अहादीस (प्रवचन)
यहाँ पर अपने प्रियः अध्ययन कर्ताओं के लिए हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चालीस महत्वपूर्ण कथन प्रस्तुत किये जारहे हैं
1- मित्र व शत्रु
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि आपका मित्र वह है जो आपको बुराईयों से रोके व आप का शत्रु वह है जो आपको बुरे कार्यों का निमन्त्रण दे।
2- वसीयत
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि मैं तुमको वसीयत करता हूँ कि अल्लाह से डरो व अपने स्वास्थ का ध्यान रखकर अपनी आयु को बढ़ाओ। और उन लोगों की भाँती न बनो जो दूसरों को पाप से डराते हैं परन्तु स्वंय पाप से नहीं डरते।
3- जिहाद के प्रकार
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि जिहाद चार प्रकार के हैं इन मे से दो जिहाद सुन्नत हैं तथा दो जिहाद फ़र्ज़ हैं। क- फ़र्ज़ जिहाद –
(अ) व्यक्ति का स्वंय अपने वश से लड़ना (अर्थात व्यक्ति अल्लाह के आदेशों की अवहेलना न करना) तथा यह महान् जिहाद है।
(आ) नास्तिक लोगों के साथ लड़ना
ख- सुन्नत जिहाद
(अ) शत्रु से जिहाद तथा यह जिहाद प्रत्येक उम्मत(समाज) पर अनिवार्य किया गया है। अगर यह जिहाद न किया जाये तो उम्मत(समाज) संकट मे घिर जायेगी और यह संकट स्वंय उम्मत द्वारा उत्पन्न किया गया होगा। इस प्रकार का जिहाद सुन्नत है। तथा इस जिहाद की सीमा यहाँ तक है कि इमाम उम्मत के साथ शत्रु की खोज मे निकले तथा उनसे जिहाद करे।
(आ) दूसरा सुन्नत जिहाद यह है कि मनुष्य सुन्नतों को क्रियान्वित करने के लिए प्रयास करे। हज़रत पैगम्बर ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जो सुन्नतों व अच्छाईयों को क्रियान्वित करता है उसको उसके कार्यो का बदला दिया जायेगा। तथा क़ियामत तक जो व्यक्ति उसके द्वारा क्रियान्वित सुन्नत पर पगबध होंगे उनका पुण्य भी उसको दिया जायेगा इस प्रकार कि उस सुन्नत पर पगबध होने वालों के पुण्य मे कोई कमी नही की जायेगी।
4- संसार का बदला रूप
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कर्बला की यात्रा के समय कहा कि संसार परिवर्तित व अपरिचित होगया है। इसने परिचितों की ओर से मुहँ मोड़ लिया है। यह संसार केवल एक चरी हुई चरागाह के समान शेष रह गया है। क्या आप नही देखते कि हक़ (शोभनीय) पर अमल नही हो रहा है व बातिल(अशोभनीय) से मना नही किया जारहा है। ऐसी स्थिति मे मोमिन (आस्तिक) का मरजाना ही अच्छा है। इस स्थिति मे मैं मृत्यु को भलाई तथा अत्याचारियों के साथ जीवित रहने को मृत्यु समझता हूँ। वास्तव मे लोग संसारिक मोह माया मे फसे हैं व धर्म केवल उनके कथन तक सीमित है। जब उनको विपत्ति के समय परखा जाता है तो धार्मिक लोग कम निकलते हैं।
6 –नेअमतो की अधिकता
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह जब किसी को अपनी ओर से ग़ाफ़िल (निश्चेत) करता है तो उसको अधिक नेअमते प्रदान करता है। तथा उससे शुक्रिये (धन्यवाद) की तौफ़ीक़ (सामर्थ्य) ले लेता है।
7- इबादत(आराधना)
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि एक समुदाय अल्लाह की इबादत स्वर्ग प्राप्ति के लिए करता है। तथा यह इबादत व्यापारियों वाली इबादत है। एक समुदाय अल्लाह की इबादत नरक के भय के कारण करता है। तथा यह इबादत दासों वाली इबादत है। एक समुदाय अल्लाह की इबादत इस लिए करता है कि अल्लाह को इबादत योग्य समझता है।तथा यह इबादत सर्वश्रेष्ठ इबादत है व सवतन्त्रता का संकेत देती है।
8- अत्याचार न करो
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह के अतिरिक्त जिसकी कोई सहायता करने वाला न हो उस व्यक्ति पर कभी भी अत्याचार न करो।
9- आवश्यकता
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि इन तीन लोगों के अतिरिक्त आपकी अवश्यक्ता को कोई पूरा नही कर सकता (1) दीनदार (अर्थात धार्मिक व्यक्ति ) (2) वीर पुरूष (3) अच्छा व्यक्तित्व रखने वाला।
10- बुद्धि मत्ता व मूर्खता
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि बुद्धिजीवियों की संगत मे बैठना बुद्धिमत्ता का प्रतीक है।मुसलमानो का आपस मे झगड़ना मूर्खता का प्रतीक है। अपने कथन की स्वंय आलोचना करना ज्ञानी होने का प्रतीक है।
11- नरक से मुक्ति
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह के भय से रोना नरक से मुक्ति का कारक है।
12- कंजूस
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि दूसरों को सलाम करने से बचने वाला व्यक्ति कंजूस है।
13- पापीयों के अनुसरण का पल
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई किसी के पास अल्लाह के आदेशों की अवहेलने करने के लिए एकत्रित हों तो वह जो इच्छायें ऱखते उनकी की पूर्ति न होगी और वह जिन चीज़ों से बचना चाहते हैं उनमे ग्रस्त हो जायेंगे।
14- नीचता स्वीकार नही करूँगा
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि मैं अल्लाह की सौगन्ध के साथ कहता हूं कि मैं कभी भी नीचता को स्वीकार नही करूँगा तथा क़ियामत (प्रलय ) के दिन हज़रत फ़ातिमा ज़हरा अपने हज़रत पिता से भेंट करेगीं और उन समस्त अत्याचारों की अपने पिता से शिकायत करेंगी जो पैगम्बर की उम्मत ने उनकी संतान पर किये हैं। और वह व्यक्ति जिसने हज़रत फ़ातिमा की संतान पर अत्याचार किये वह स्वर्ग मे नही जासकता।
15- क़ियाम(आन्दोलन) के उद्देश्य
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि मैं अपने आपको मनवाने, सुखमय जीवन व्यतीत करने,उपद्रव मचाने या अत्याचार करने के लिए नही निकला हूँ। बल्कि मैं चाहता हूँ कि इस्लामी समाज मे सुधार करू तथा लोगों को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करूँ व बुराईयों से रोकूँ व अपने नाना व पिता की सुन्नत(शैली) को क्रियान्वित करूँ।
16- शासन का अधिकार
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि हम अहलेबैत शासन के शासन कर रहे लोगों से अधिक हक़दार हैं।
17- इमाम के लक्षण
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि इमाम वह है जो कुऑनानुसार कार्य करे,न्याय के मार्ग पर चले व हक़ का अनुसरण करे तथा स्वंय को अल्लाह की प्रसन्नता के लिए समर्पित करदे।
18- शासन का अधिकार
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि ऐ लोगो अगर तुम अल्लाह से डरते हो और हक़ को हक़दार के पास देखने चाहते हो तो यह कार्य अल्लाह की प्रसन्नता के लिए बहुत अच्छा है।हम पैगम्बर के अहलेबैत शासन के अन्य अत्याचारी व व्याभीचारी दावेदारों से अधिक अधिकारी हैं।
19- अत्याचार के सम्मुख चुप रहने का फल
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि ऐ लोगो पैगम्बर ने कहा कि अगर कोई देखे कि एक अत्याचारी शासक अल्लाह द्वारा हराम की गयी चीज़ों को हलाल कर रहा है, अपने वचन से फिर रहा है, पैगम्बर की सुन्नत का विरोध कर रहा है, तथा लोगों के मध्य गुनाह व अत्याचार के आधार पर कार्य कर रहा है।तो अगर कोई इस स्थिति मे उसका क्रियात्मक व विचारात्मक विरोध न करे तो वह भी उस अत्याचारी के साथ ही नरक मे डाला जायेगा।
20- अल्लाह को नाराज़ करना
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि वह व्यक्ति कभी भी सफल नही हो सकते जो अल्लाह की प्रजा को प्रसन्न करने के लिए अल्लाह को नाराज़ करदे। 21- वफ़ादार साथी
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने मुहर्रम की दसवी रात्री मे कहा कि मैने अपने साथियो से अच्छे किसी के साथी नही देखे तथा अपने परिवार से वफादार कोई परिवार नही देखा अल्लाह तुम सबको अच्छा बदला दे।
22- हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के साथी
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने साथियों के सम्बन्ध मे कहा कि अल्लाह की सौगन्ध मैने इनकी परीक्षा कर ली है मैने इनको वीर व अडिग पाया है। यह लोग मेरे साथ कत्ल होने को इसी प्रकार तत्पर हैं जिस प्रकार एक बच्चा अपनी माता के स्तन के लिए तत्पर रहता है।
23- तसल्ली (सात्वना) के शब्द
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपनी बहन को तसल्ली(सांत्वना) देते हुए कहा कि पृथ्वीवासी मरते है तथा आकाशवासी भी सदैव जीवित रहने वाले नही हैं संसार की समस्त वस्तुओं के लिए मृत्यु है। केवल वह अल्लाह शेष रहेगा जिसने अपनी शक्ति से इस पृथ्वी को रचा है और समस्त प्राणी उसी की ओर पलटायें जायेंगे तथा वह अल्लाह एक है।
24- मृत्यु एक पुल है
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने मुहर्रम मास की दसवी तारीख को अपने वीर साथियों से कहा कि ऐ शरीफ़ व आदरनीय माता पिता की संतानों धैर्य व संतोष से कार्य करो कि मृत्यु एक पुल मात्र है जो तुमको दुखः दर्द से पार उतार कर अमिट नेअमतों वाले स्वर्ग मे पहुँचा देगा।
25- संसार अल्प कालीन है
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि ऐ अल्लाह के बन्दो अल्लाह से डरो व संसारिक मोहमाया के जाल मे न फसो। क्योंकि अगर ऐसा होता कि समस्त संसार एक व्यक्ति को दे दिया जाये या व्यक्ति सदैव इस संसार मे जीवित रहे तो इस कार्य के लिए पैगम्बराने खुदा सर्वश्रेष्ठ थे। परन्तु ऐसा नही है अल्लाह ने इस संसार को नष्ट करने के लिए रचा है। इस संसार की प्रत्येक नवीन वस्तु पुरानी होने वाली है यहाँ की सब नेअमते नष्ट हो जायेंगी तथा समस्त प्रसन्नताऐं दुखोः मे बदल जायेगी। यह संसारअल्प कालिक व साधारण स्थान है। अतः परलोक के लिए सामान तैयार करो व परलोक के लिए सर्वश्रेष्ठ सामान तक़वा है। अतः अल्लाह से डरो शायद इस प्रकार मुक्ति पाजाओ।
26- अपमान स्वीकार नही है
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह की सौगन्ध मैं अपमान के साथ अपना हाथ उसके(यज़ीद) हाथ मे नही दूँगा और न मैं दासों की तरह उनके(यज़ीदी सेना) सामने से मैदान से भागूँगा।
27- हराम भोजन के प्रभाव
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने मुहर्रम मास की दसवी तारीख को अपने शत्रु की सेना को सम्बोधित करते हुए कहा कि तुम पर धिक्कार हो शांत क्यों नही होते हो कि मेरी बात सुन सको। मैं तुम को मुक्ति के मार्ग पर बुला रहा हूँ, जो मेरी बात मानेगा वह मुक्ति पाने वालों मे से होगा व जो मेरी बात नही मानेगा वह हतात होने वालों मे से होगा। तुम सब न मेरी बात सुन रहे हो और न मेरी बात मान रहे हो। तथा ऐसा इस कारण है कि तुम्हारे पेट हराम भोजन से भरे हुए है तथा तुम्हें जो उपहार दिये गये हैं वह भी हराम हैं अतः अल्लाह ने तुम्हारे दिलों को सील कर दिया अब तुम्हारे ऊपर किसी बात का असर नही होगा। 28- दुष्ट की आधीनता
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि जान लो कि कमीने के कमीने पुत्र ने मुझे मृत्यु व अपमान के दोराहे पर ला खड़ा किया है। और मैं कभी भी अपमान के मार्ग को नही चुन सकता। क्योंकि खुदा पैगम्बर व मोमेनीन अपमान को स्वीकार करने से बचते हैं। पवित्र माताओ व शरीफ़ पिताओं की संतान व स्वाभिमानी लोग यह पसंद नही करते कि मृत्यु पर किसी दुष्ट व्यक्ति की आधीनता को प्रधानता दी जाये।
29- अल्लाह का क्रोध
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह के क्रोध की यहूदियों पर उस समय अधिकता हो गयी जब उन्होंने यह कहा कि अल्लाह पुत्रवान है। व इसाईयों पर अल्लाह का क्रोध उस समय बढ़ गया जब वह तीन खुदाओं मे आस्था रखने लगे। व मजूसियों पर अल्लाह का क्रोध उस समय बढ़ गया जब वह उसको छोड़कर सूर्य व चन्द्रमा की पूजा करने लगे व अन्य समुदायों पर अल्लाह का क्रोध उस समय अधिक हो गया जब वह अपने पैगम्बर की पुत्री की संतान की हत्या करने के लिए एक जुट हो गये।
30- स्वतन्त्र व्यक्ति
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि ऐ अबुसुफ़यान के परिवार का अनुसरण करने वालो अगर तुम्हारे पास धर्म नही है और तुम परलय के दिन से नही डरते हो तो कम से कम एक स्वतन्त्र व्यक्ति की भाँती जीवन यापन करो। और अगर अपने आपको अरब कहते हो तो अपने उपकारों के बारे मे विचार करो।
31- प्राथमिक्ता व स्वर्ग
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर दो व्यक्तियों के मध्य किसी बात पर झगड़ा हो जाये तो उन दोनों मे से जो भी व्यक्ति दूसरे को मनाने मे प्राथमिकता करेगा व स्वर्ग मे जायेगा।
32- सलाम करने का फल
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि सलाम मे सत्तर पुण्य हैं जिसमे से उन्हत्तर पुण्य उस व्यक्ति के लिए है जो सलाम करे तथा एक पुण्य उस व्यक्ति के लिए है जो सलाम का जवाब दे।
33- अल्लाह का क्रोध व प्रसन्नता
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति जनता के क्रोध की परवाह किये बिना अल्लाह को प्रसन्न करने के लिए कार्य करे तो अल्लाह स्वंय उसके सम्बन्धो को जनता के मध्य अच्छा बना देता है। तथा जो व्यक्ति अल्लाह के क्रोध की परवाह किये बिना जनता को प्रसन्न करने की चेष्टा करता है तो अल्लाह उसको जनता पर ही छोड़ देता है।
34- इमाम महदी की विशेषताऐं
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम नेहज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के बारे मे कहा कि तुम लोग उनको गंभीरता, संतोष, हलाल व हराम की पहचान रखने वाले तथा लोगों को उनकी ओर आकर्षित होने व उनको लोगों से बेज़ार (अन भिज्ञय) रहने के लक्षणो के साथ पहचान सकते हो।
35- संसारिक सुख दुख
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि जानलो कि संसार की प्रसन्नताऐं व दुख एक सपने के समान हैं तथा वास्तविकता परलोक मे है।
36- महत्ता का कम होना
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने मुख से ऐसी बात मत कहो जो आपकी महत्ता को कम कर दे।
37- आदर के साथ मरना
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि आदर के साथ मरना अमर हो जाना है और अपमान के साथ जीवित रहना गुमनाम हो जाना है।
38- धोखा धड़ी
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि धोखा धड़ी व बहाना बनाने को हम अहलेबैत हराम जानते हैं।
39- मृत्यु आदम के पुत्रो का हार है
मक्के से इराक़ की ओर यात्रा करते समय बनी हाशिम को सम्बोधित करते हुए हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि मृत्यु आदम के पुत्रों के गले की माला है। मैं अपने पूर्वजों को देखने के लिए इस प्रकार तत्पर हूँ जैसे याक़ूब अलैहस्सलाम युसुफ़ अलैहिस्सलाम को देखने के लिए तत्पर थे ।
40- संसारिक व परलोकीय जीवन
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कूफ़े की ओर प्रस्थान करते समय कहा कि इस संसार का जीवन सुखमय व मूल्यवान है। परन्तु परलोक मे अल्लाह से मिलने वाला पुरस्कार इससे अधिक मूल्यवान है।
अगर माल इकठ्ठा करने का परिणाम इससे दूर होजाना है तो इन्सान को चाहिए कि माल मे कंजूसी न करे।
अगर इन्सान की जीविका (अल्लाह द्वारा) विभाजित होती है तो इसको प्राप्त करने मे थोड़ी सी हिर्स अच्छी है।
अगर इन्सान मृत्यु के लिए बनाया गया है तो अल्लाह के मार्ग मे क़त्ल होना कितना अच्छा है ऐ पैगम्बर की संतानो तुम पर अल्लाह की दया व कृपा हो मै शीघ्र तुम्हारे मध्य से चला जाऊँगा।

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