सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद की देहरादून में एक केन्द्रीय कार्यकारिणी तथा करीबन10 शाखाएं
चन्द्रृशेखर जोशी-
22, March, 2015, 01.45PM (मिज़गान न्यूज़ नेट)
बसंत पंचमी के बाद से राजधानी देहरादून में कूर्माचल परिषद की होली का हर आम व खास को बेसब्री से इंतजार रहता है, कूर्माचल परिषद की होली पर विस्तादर से प्रकाश डाल रहे हैं चन्द्र शेखर जोशी केन्द्री य महासचिव- कूर्माचल परिषद, देदून
केन्द्रीय कूर्माचल परिषद ने अनेक शाखाओं का गठन कर जन-जन तक कुमाऊॅनी संस्कृति, रीति रिवाज, खान-पान, रहन सहन, भाषा (बोली) को प्रचारित करते हुए अनेक कार्यक्रम के माध्यम से जनता को संगठित किया, जिसके फलस्वरूप कूर्माचल सांस्कृतिक परिषद, देहरादून प्रमुखता से सांस्कृतिक व सामाजिक संस्था के रूप में अपना स्थान देहरादून में स्थापित करने में सफल हो सका है।
कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं विकास हेतु तत्पर संस्था है। पूर्णरुपेण सामाजिक संस्था पर्वतीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित व बढावा देने का काम कर रही है तथा इसका उद्देश्य जनहितकारी व वास्तविक जरुरत की सहायता करने की संकल्प शक्ति बनाना है। परिषद उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं विकास हेतु लगातार कार्यक्रम चला रही है। परिषद के सदस्यों को आपस में सम्फ अभियान को बढावा देना तथा सदस्यों के सुख-दुख में बराबर सहभागी बनाना ही मूल भावना है। सम्फ, सहयोग, संस्कार, समर्पण यह हमारे सूत्र हैं। बुजुर्गो का सम्मान परिषद का ध्येय है। ज्ञात हो कि कूर्माचंल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद की देहरादून में एक केन्द्रीय कार्यकारिणी तथा करीबन 10 शाखाएं हैं यह कूर्माचल परिषद की केन्दीय परिषद व समस्‍त शाखा एक पंजीकरण संख्‍या 159 डी के अन्‍तर्गत संवैधानिक रूप से काम करती व गठित होती है। जो इस इस पंजीकरण तथा संविधान को नही मानता वह कूर्माचल परिषद के अन्‍तर्गत नही आती परन्‍तु वह भी कूर्माचल परिषद के नाम का इस्‍तेमाल कर रही है।
केन्द्रीय कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद, देहरादून द्वारा अनेक झंझावातों के उपरांत इस वर्ष होली मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। बरसाने की होली के बाद सांस्कृतिक विशेषता के लिए कुमाऊॅनी होली को याद किया जाता है। फूलों के रंगों और संगीत की तानों का ये अनोखा संगम देखने लायक होता है। शाम ढलते ही कुमाऊॅ के घर-घर में बैठक होली की सुरीली महफिले जमने लगती हैं। होली की यह रिवायत महज महफिल नहीं बल्कि एक संस्कार भी हैं। पूरे विश्व में इस होली की अलग पहचान है। मुख्य रूप से होली के दो अंग है। १- बैठकी होली तथा खडी होली। बैठकी होली बैठकर शास्त्रीय धुनों पर गायी जाने वाली होली को कहा जाता है जिसमें होल्यार रंग से सरोबार होकर होली गाते हैं। यह होली बसंत पंचमी से शुरू हो जाती है। इसी प्रकार खडी होली- होली के दिनों में खडे होकर गायी जाती है। दिनांक ८ मई, १९८८ को संस्था का विधियत प्रथम आम चुनाव श्री आनन्द कुमार जोशी (सेवानिवृत्त डी.आई.जी.) की देखरेख में सम्पन्न किया गया जिसमें निम्न कार्यकारिणी का गठन किया गया।
१- अध्यक्ष- स्व० श्री तारा चरण जोशी, २- उपाध्यक्ष- स्व० कर्नल गोपाल सिंह बोहरा, ३- सचिवः- श्री आरएस परिहार,४- सह सचिवः- श्री मोहन चन्द्र पाठक, ५- भण्डारीः- श्री बद्रीप्रसाद पंत, ६- कोषाध्यक्षः- श्री किशन चन्द्र जोशी, ७- लेखा परीक्षकः- श्री पूरन चन्द्र पंत, ८- विधि सचिवः- विधि सचिवः- श्री योगेश पंत, ९- सांस्कृतिक सचिवः- श्री हरीश चन्द्र पाण्डे (एम०ई०एस०) १०- सांस्कृतिक उप सचिवः- श्री शिवदत्त जोशी संगठन द्वारा समिति का भी गठन निम्न प्रकार किया गया जिससे क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार हो सके। १- श्री हरगोविन्द प्रसाद पाण्डे, २- श्री बद्री प्रसाद पंत, ३- श्री प्रकाश चन्द्र पाण्डे, ४- श्री लीलाधर काण्डपाल, ५- श्री धर्मानन्द पंत, ६- कैप्टन भैरव सिंह, ७- कैप्टन धन सिंह रौतेला, ८- श्री प्रमोद कुमार पाण्डे, ९- श्री रमेश चन्द्र जोशी, १०-श्री चन्द लाल शाह, ११- श्री हरिबल्लभ अवस्थी, १२- श्री ………पंत जी, १३- श्री रेवाधर पाण्डे, १५- श्री धर्मानन्द तिवारी, १६- श्री महेश चन्द्र लोहनी, १७- श्री देवेन्द्र चन्द्र जोशी, १८- श्री खीम सिंह बिष्ट, १९- श्री पूरन सिंह नेगी।
संस्था द्वारा शाखाओं में सांस्कृतिक,सामाजिक व धार्मिक कार्यकलापों को प्रमुखता से आगे बढाया है तथा शाखाओं का विस्तार करते हुए कूर्माचलीय परिवारों को जोडने का भरसक प्रयास किया है। वर्तमान में कांवली शाखा, माजरा शाखा, गढी कैंट शाखा, हाथीबडकला शाखा, धर्मपुर शाखा, नत्थनपुर शाखा अपनी-अपनी शाखाओं में समय-समय पर सांस्कृतिक सामाजिक व कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाये रखने का प्रयास करते रहे हैं। अन्य शाखायें रायपुर शाखा, बालावाला शाखा भी अपनी क्षमतानुसार क्षेत्रीय जनता को जोडने में सफल रहे हैं। इंदिरा नगर शाखा ने केन्द्रीय परिषद को महत्वपूर्ण योगदान दिया ह। किन्तु अपनी महत्वाकांक्षा के कारण केन्द्रीय परिषद के संविधान का पालन शाखा द्वारा नहीं करने से केन्द्रीय परिषद को क्षति पहुंची है। इसलिए आमसभा में निर्णय लिया गया कि जो भी शाखा संस्था के संविधान के अनुरूप कार्य नहीं करेगी उसे केन्द्रीय परिषद शाखा के रूप में सम्बद्ध नहीं करेगी।
वर्तमान कार्यकारिणी को संस्था की बिगडी हुई स्थिति को सुधारने में अत्यधिक परिश्रम करना पड रहा है। ३ फरवरी १९९३ की केन्द्रीय परिषद की आम सभा में सदस्यों द्वारा प्रस्ताव लाया गया कि देहरादून में सभी सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक संगठनों ने अपने-अपने समाज के हितों का ध्यान रखते हुए धर्मशालायें, गुरूद्वारा, मस्जिद, चर्च व सांस्कृतिक भवनों का निर्माण कर व्यवस्था की है, एकमात्र कुमाऊॅनी समाज द्वारा कोई भी प्रयास नहीं किया गया है जबकि देहरादून व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की संख्या में कूर्माचलीय परिवार स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। इस प्रस्ताव को अत्यधिक गम्भीरता से लेते हुए शहर में कूर्माचल भवन निर्माण करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। संस्था ने इस कार्य को अपना लक्ष्य रखा तथा भवन हेतु भूमि की तलाश सक्रियता से की गयी। सन् १९९६-१९९८ के कार्यकाल में पुनः संस्था के पदाधिकारी व सदस्यों द्वारा युद्ध स्तर पर प्रयास किया गया जिसमें सिलिंग कार्यालीय में कार्यरत श्री गिरीश चन्द्र भट्ट श्री व श्री कौस्तुभ पाठक के सहयोग से शहर में सिलिंग की भूमि की जानकारी प्राप्त हो सकी। तत्कालीन जिलाधिकारी श्री प्रताप सिंह व सिलिंग के अधिकारी श्री जीपी ……………. के सकारात्मक सहयोग से शहर के सभी सिलिंग की भूमि दिखाई गयी। राजपुर रोड में मधुबन होटल के पीछे सालावाला क्षेत्र में संस्था के लिए उपयुक्त भूमि प्रस्तावित की गयी जिसके लिए प्रस्ताव भेजकर लखनउफ, उत्तर प्रदेश के संबंधित विभाग को भूमि आवंटित हेतु प्रस्ताव भेजा गया। इस भूमि की लागत उस समय मात्र ३८ हजार रूपया थी।
९ नवम्बर २००० को उत्तराखण्ड राज्य का गठन होने पर लखनऊ से प्रस्ताव यहां वापस भेज दिया गया। सन् २००२ में संस्था की प्रस्तावित भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा अपने नाम पर भूमि की रजिस्ट्री करा ली गयी। संस्था की ओर से कोई विरोध न होने के कारण संस्था को प्रस्तावित भूमि से वंचित होना पडा। सन् २००२-२००३ के बाद नई कार्यकारिणी के गठन के पश्चात पुनः युद्ध स्तर पर प्रयास किये गये जिसमें विशेष सहयोग श्री गोविन्द बल्लभ पाण्डे जी का रहा है। इनके द्वारा कांवली, जीएमएस रोडपर नगर निगम की भूमि जो लगभग २ बीघा थी, बतायी गयी और इसे प्राप्त करने हेतु विशेष प्रयास किये गये। तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, मा० श्री नारायण दत्त तिवारी जी व मा० गणेश जोशी जी वर्तमान विधायक, स्व० श्री कैलाश पंत जी विशेष कार्याधिकारी मुख्यमंत्री के विशेष प्रयास से उक्त भूमि संस्था को स्वीकृत हो सकी किन्तु संस्था को नगर निगम से भूमि प्राप्त करने में एक वर्ष से अधिक का समय लगा। इस कार्य में मा० श्री हरीश रावत जी वर्तमान केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार तथा तत्कालीन पार्षदों मा० सुरेन्द्र कुमार अग्रवाल जी आदि व अनेक सामाजिक, राजनीतिक व संस्था के प्रमुखों व सक्रिय सदस्य श्री के०एन० पंत जी, श्री एलएम पाण्डे जी, श्री के०सी० जोशी जी, श्रीमती शाह जी, श्री गिरीश चन्द्र भटट् जी आदि के सहयोग के फलस्वरूप भूमि की रजिस्ट्री संस्था के नाम पर हो सकी।
तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड मा० श्री नारायण दत्त तिवारी जी, मा० श्री दिनेश अग्रवाल जी,मा० मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार, मा० श्री गणेश जोशी वर्तमान विधायक द्वारा भवन निर्माण व अन्य बाधाओं को दूर करने में भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ जिसके फलस्वरूप दिनांक २३-१०-२००४ को तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड मा० नारायण दत्त तिवारी जी, मा० श्री भगत सिंह कोश्यारी जी पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, श्रीमती मनोरमा शर्मा जी तत्कालीन मेयर, मा० श्री गणेश जोशी जी वर्तमान विधायक द्वारा मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कूर्माचल भवन का शिलान्यास किया गया। शिलान्यास कार्यक्रम का आयोजन भव्य रूप से करने का शुभ अवसर संस्था को प्राप्त हो सका।
वर्तमान समय में कूर्मांचल भवन का निर्माण कार्य धनाभाव के कारण बाधित है। भवन का निर्माण जनभावनाओं व सांस्कृतिक तथा जन सुविधाओं के आधार पर भव्य भवन का निर्माण किया जाना है। बेसमेंट पर छत डाली गयी है। ९० फिट बाय ६० फिट का सभागार, ऊपर बालॅकोनी सहित सम्पूर्ण क्षेत्र मंन छत पडनी है। एक कार्यालय, दो शौचालय का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। आगे का मुख्य कार्य सभागार (ड्रामेटिकल हॉल) व बालकोनी पर छत का निर्माण कार्य सर्वप्रथम किया जाना नितांत आवश्यक है। इसके पश्चात बेसमेंट व सभागार को पूर्ण करने के पश्चात भवन उपयोग में लाने योग्य हो सकेगा। इस कार्य के लिए तकनीकी समिति के इंजीनियरों द्वारा अनुमानित व्यय …………….. निर्धारित किया गया है।
कूर्माचल भवन निर्माण में प्रारम्भ से ही तकनीकी समिति के सदस्य के रूप में श्री ………… लोहनी, सेवानि० सुपरि० इंजीनियर,श्री चन्द्रशेखर उप्रेती जी- सेवानि० अधिशासी अभियंता, श्री एसएस पंत- अधिशासी अभियन्ता, श्री देवेन्द्र शाह- सहायक अभियन्ता, श्री पीसी लौशाली जी- सहायक अभियन्ता …………………………………, भवन निर्माण समिति के संयोजक श्री गोविन्द बल्लभ पाण्डे के अथक प्रयासों से भव्य कूर्माचल भवन की नींव व अन्य निर्माण कार्य सफल हो सका।
भवन के ऊपरी मंजिल में आगंतुकों हेतु ठहरने के लिए कमरों, सभाकक्ष, कीचन, म्यूजियम, शौचालय, कार्यालय आदि कक्षों का प्रस्ताव मानचित्र में किया गया है।
केन्द्रीय परिषद द्वारा समय-समय पर विस्तार के साथ-साथ अपने संविधान को बडा स्वरूप देते हुए अनेक परिवर्तन परिवर्द्वन किये। सन् १९९८ में कूर्माचल की सांस्कृतिक, सामाजिक, भौगोलिक, धार्मिक, रीतिरिवाज, विभूतियों व दर्शनीय स्थलों को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से घुघुति समौण पत्रिका का प्रकाशन किया। पत्रिका के प्रकाशन में श्रीमती भारती पाण्डे, श्रीमती उमा जोशी, श्री कौस्तुभ पंत जी, श्री बीडी जोशी जी, डा० हरीश चन्द्र शाह जी, श्री डीडी पुनेठा जी, श्री बहादुर सिंह राणा, श्री गोविन्द बल्लभ पाण्डे जी, श्री एलएम पाण्डे जी आदि अनेक सदस्यों का सहयोग प्राप्त हुआ है। साथ ही कॉवली शाखा के अथक प्रयासों से अनेक कार्यक्रमों के साथ-साथ बाटुली पत्रिका का भी प्रकाशन किया जा रहा है।
परिषद के पदाधिकारियों का विवरण
०२-०५-१९८७- ०७ मई १९८८ अध्यक्ष- श्री ताराचरण जोशी सचिव- श्री केसी जोशी
०८ मई १९८८ – १७-११-१९९० अध्यक्ष- श्री ताराचरण जोशी सचिव- श्री आर०एस० परिहार
१८-११-१९९० -०९-०१-१९९३ अध्यक्ष- श्री हरिबल्लभ अवस्थी सचिव- श्री आर०एस० परिहार
१०-०१-१९९३ -०६-०१-१९९६ अध्यक्ष- श्री प्रकाश चन्द्र पाण्डे सचिव- श्री गोविन्द बल्लभ पाण्डे
०७-०१-१९९६ -२२-०८-१९९८ अध्यक्ष- श्री आर०एस० परिहार सचिव- श्री सी०पी० जोशी
२३-०८-१९९८ -१६-०९-२००० अध्यक्ष- श्री आर०एस० परिहार सचिव- श्री गिरीश चन्द्र भट्ट
१७-०९-२००० -०५-०९-२००२ अध्यक्ष- श्री पी०सी० पंत महासचिव- श्री गिरीश चन्द्र भट्ट
०६-०९-२००२ -०७-०८-२००४ अध्यक्ष- श्री आर०एस० परिहार महासचिव- श्री बंशीधर जोशी
०८-०८-२००४ -०९-०१-२००६ अध्यक्ष- श्री आर०एस० परिहार महासचिव- श्री गिरीश चन्द्र भट्ट
१०-०१-२००६ -२४-०२-२००८ अध्यक्ष- श्री आर०एस० परिहार महासचिव- श्री गिरीश चन्द्र भट्ट
२३-०२-२००८ -०८-०५-२०१० अध्यक्ष- श्री पी०सी० पंत महासचिव- श्री चन्द्र लाल शाह
०९-०५-२०१० -२८-०९-२०१२ अध्यक्ष- श्री उमेश कापडी (कार्यवाहक अध्यक्ष ) महासचिव- श्री कमल सिंह रजवार
२९-०९-२०१२ – वर्तमान अध्यक्ष- श्री आर०एस० परिहार महासचिव- श्री चन्द्रशेखर जोशी (सम्पादक)
वर्तमान केन्द्रीय कार्यकारिणी (२०१२ से)
संरक्षक मण्डलः -मा० हरीश रावत – केन्द्रीय मंत्री, भारत सरकार
-मा० भगत सिंह कोश्यारी- संसद सदस्य तथा पूर्व मुख्यमंत्री- उत्तराखण्ड
-मा० गणेश जोशी- विधायक मसूरी
-मा० मयूख महर- विधायक पिथौरागढ
पदाधिकारी
अध्यक्ष -श्री आर०एस० परिहार
वरिष्ठ उपाध्यक्ष – श्री उमेश कापडी
कार्यकारी अध्यक्ष -श्री गिरीश चन्द्र भट्ट
उपाध्यक्ष -श्री एल०डी० पन्त
उपाध्यक्ष (महिला) -श्रीमती उमा जोशी
महासचिव -श्री चन्द्रशेखर जोशी
कोषाध्यक्ष -श्री वीरेन्द्र काण्डपाल
संयुक्त सचिव -श्री आर० बिरोडिया
प्रचार-प्रसार सचिव -श्री यू०एस० अधिकारी
संगठन सचिव (पु०) – श्री शेखर चन्द्र जोशी
संगठन सचिव (म०) -श्रीमती कान्ता बिष्ट
सांस्कृतिक सचिव (पु०)-श्री मदन जोशी
सांस्कृतिक सचिव (म०)-श्रीमती प्रेमा तिवारी
लेखा परीक्षक -श्री मोहन चन्द्र पाठक
कानूनी सलाहकार -श्री सी०पी० जोशी
भवन निर्माण संयोजक -श्री गोविन्द बल्लभ पाण्डे
सूचना अधिकारी -श्री कमल सिंह रजवार
वर्तमान कार्यकारिणी ने संस्था के उत्थान व भवन निर्माण के लिए पुनः एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया है। आशा है कि कूर्माचल भवन का निर्माण कार्य सभी के विशेष सहयोग से सम्पन्न होगा तथा कूर्माचल भवन से संस्था के साथ-साथ जनता को भी लाभ मिल सकेगा। संस्था के निर्माण एवं उत्थान के लिए अनेक सक्रिय महानुभावों ने समय-समय पर निर्वाचित पदाधिकारियों, अनेक सदस्यों का अनुकरणीय योगदान रहा है। ऐसे अनेक महापुरूष व महिलायें हमारे बीच नहीं रहे हैं, समस्त कूर्माचलीय समाज उनके योगदान को कभी नहीं भूलेगा। अन्त में उन्हें याद करते हुए परिषद श्रद्वासुमन अर्पित करती है। सादर, प्रकाशनार्थ चन्द्रीशेखर जोशी-
केन्द्री य महासचिव-
कूर्माचल परिषद
mail; csjoshi_edito@yahoo.in
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