प्रो. मुज़फ़्फ़र हनफ़ी की ग़ज़लें
 मधुर रस धार ............... कृष्ण कान्त मधुर
 एक कली सा खिला मेरा मन ........ सय्यद इक़बाल रिज़वी शारिब
 इस तगाफुल का भी जवाब नहीं ….सीमा गुप्ता
 इस तरह दिल पे मुसल्लत है रिफाकात उसकी ….सीमा गुप्ता
 ग़ज़लें ….दाग़ देहलवी
 गांधी नामा-----अक़बर इलाहाबादी
 अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जायेंगे--------मोहम्मद इब्राहिम ज़ौक़
 ग़ज़लें-------------मिर्ज़ा ग़ालिब
 कोई हमसफर अच्छा लगे...:रज़ा जलालपुरी
 रोटियाँ , नज़ीर अकबराबादी
 छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा ,,, मीना कुमारी
 मिट्‍टी में मिलाना कि खिलौना हो जाऊँ ------मुनव्वर राना के अशआर
 इबादत करते हैं जो लोग जन्नत की तमन्ना में--जोश मलीहाबादी
 स्‍वदेशी तहरीक---- त्रिलोकचन्‍द महरूम
 कोई हमसफर अच्छा लगे...:रज़ा जलालपुरी
 रोटियाँ , नज़ीर अकबराबादी
 फ़क़ीरों की सदा , नज़ीर अकबराबादी
 आदमी नामा , नज़ीर अकबराबादी
 ईद उल फ़ितर , नज़ीर अकबराबादी
 जब खेली होली नंद ललन , नज़ीर अकबराबादी
 देख बहारें होली की , नज़ीर अकबराबादी
 होली की बहार , नज़ीर अकबराबादी
 बंजारानामा नज़ीर अकबराबादी
 
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